दुर्ग के 17 पीएम श्री विद्यालयों के शिक्षकों का क्षमतावर्धन प्रशिक्षण सम्पन्न
नई शिक्षा नीति-2020 के तहत बालवाड़ी एवं एफएलएन को मजबूत बनाने पर हुआ मंथन।
दुर्ग छत्तीसगढ़–
दुर्ग, 10 जुलाई। नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा एवं देखभाल (ECCE) को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को विवेकानंद ऑडिटोरियम, सिविल लाइन, दुर्ग में जिले के 17 पीएम श्री विद्यालयों में संचालित बालवाड़ी कार्यक्रम के शिक्षकों एवं संबंधित संकुल समन्वयकों का एक दिवसीय बैठक सह क्षमतावर्धन प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में लगभग 40 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम में जिला मिशन समन्वयक विनोद सिन्हा, एपीसी डॉ. शशिभूषण शर्मा, अह्वान ट्रस्ट से शीतल मोटघरे एवं प्रदीप शर्मा की विशेष उपस्थिति रही। वहीं मास्टर ट्रेनर के रूप में श्रीमती सीमा सिंह (प्राथमिक शाला दुर्गा मंदिर, खुर्सीपार) एवं श्रीमती सुषमा डेहरे (प्राथमिक शाला कोनारी) ने प्रशिक्षण का संचालन किया।
प्रशिक्षण में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-FS 2022) तथा ECCE की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि 3 से 8 वर्ष की आयु बच्चों के समग्र विकास की आधारशिला होती है और इसी अवधि में भाषा, संज्ञानात्मक, सामाजिक एवं भावनात्मक विकास की मजबूत नींव रखी जाती है।
बैठक के दौरान थीम आधारित शिक्षण, दैनिक कार्ययोजना, फ्री प्ले एवं सर्कल टाइम, भाषा शिक्षण की रणनीतियाँ, संज्ञानात्मक विकास, बुनियादी संख्यात्मक विकास, ELPS (Experience, Language, Picture, Symbol) पद्धति तथा गतिविधि आधारित शिक्षण पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही बच्चों के लिए तैयार 240 दिवसीय कार्ययोजना एवं 14 थीम आधारित पाठ्यक्रम की उपयोगिता पर भी विस्तार से चर्चा हुई।



प्रशिक्षण में विशेष रूप से फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (FLN) के अंतर्गत बालवाड़ी से कक्षा 2 तक बच्चों में पढ़ने, लिखने और बुनियादी गणितीय दक्षताओं को विकसित करने की रणनीतियों पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रारंभिक कक्षाओं की नींव मजबूत होगी, तभी नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकेगा।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने अपने विद्यालयों में सीखे गए नवाचारों एवं गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धतियों को लागू करने का संकल्प लिया। अधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के क्षमतावर्धन प्रशिक्षण से पीएम श्री विद्यालयों में संचालित बालवाड़ी कार्यक्रम और अधिक प्रभावी होगा तथा बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
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