आजाद भारत न्यूज़ | नवागांव, कोटा (बिलासपुर)–प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट
समिति सदस्य बैकुंठनाथ जायसवाल ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील
छत्तीसगढ़ की धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पारंपरिक खेलों को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से नवागांव स्थित प्रसिद्ध दलहा धाम में दलहा सावन महोत्सव 2026 का आयोजन पूरे उत्साह और भव्यता के साथ किया जा रहा है। श्रावण मास के पावन अवसर पर आयोजित इस महोत्सव में पूरे क्षेत्र के श्रद्धालु, ग्रामीण और संस्कृति प्रेमी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

महोत्सव के अंतर्गत श्रावण अमावस्या एवं छत्तीसगढ़ के प्रथम पर्व हरेली के शुभ अवसर पर 12 अगस्त 2026 को पारंपरिक दलहा गेड़ी दौड़ का विशेष आयोजन किया जाएगा। इस प्रतियोगिता में बच्चों, युवाओं एवं बुजुर्गों सहित सभी आयु वर्ग के प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन समिति के अनुसार विजेताओं को नगद पुरस्कार एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया जाएगा।
समिति द्वारा जारी जानकारी के अनुसार महोत्सव के दौरान भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना, जलाभिषेक, धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम तथा जनसहभागिता आधारित विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक आयोजन करना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, संस्कृति, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना भी है।
दलहा आस्था मेला आयोजन समिति के सदस्य बैकुंठनाथ जायसवाल ने क्षेत्रवासियों एवं श्रद्धालुओं से अपील करते हुए कहा कि दलहा धाम वर्षों से लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां आयोजित होने वाला सावन महोत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। उन्होंने कहा कि हरेली पर्व हमारी कृषि संस्कृति, प्रकृति और परंपराओं का प्रतीक है तथा गेड़ी दौड़ जैसी लोक खेल प्रतियोगिताएं हमारी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम हैं।
उन्होंने सभी ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं एवं श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने परिवार और मित्रों के साथ अधिक से अधिक संख्या में 12 अगस्त को दलहा धाम पहुंचें, धार्मिक कार्यक्रमों में सहभागिता करें तथा पारंपरिक गेड़ी दौड़ और अन्य आयोजनों का आनंद लेकर इस सांस्कृतिक उत्सव को सफल बनाएं।


आयोजन समिति ने बताया कि महोत्सव को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, पेयजल, पार्किंग एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि दूर-दराज़ से आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
दलहा सावन महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक खेलों, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक एकजुटता का भी एक अनूठा उत्सव बन चुका है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
— आजाद भारत न्यूज़
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