नए जिले GPM की शिक्षा की तस्वीर ऐसी है… देखें, सिर्फ कागजों में विकास!,अधिकारी स्कूल में झांकते भी नही।
जर्जर स्कूल भवन और बदहाल शौचालयों के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चे, CM हेल्पलाइन में शिकायत के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति
आजाद भारत न्यूज़-आवाज आपकी-प्रदीप की रिपोर्ट
GPM। नए जिले गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे भले ही लगातार किए जा रहे हों, लेकिन ग्रामीण अंचलों के स्कूलों की जमीनी तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। मरवाही विकासखंड के ग्राम भस्कुरा स्थित प्राथमिक शाला की स्थिति देखकर सहज ही सवाल उठता है कि आखिर शिक्षा के क्षेत्र में विकास का लाभ बच्चों तक कितना पहुंच रहा है?
जर्जर भवन, खराब मूलभूत सुविधाएं और बदहाल शौचालयों के बीच बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय के पुराने भवन की हालत चिंताजनक है। भवन की छत की मरम्मत के लिए शीट लगाई गई है, लेकिन इसकी गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मरम्मत कार्य में गुणवत्तापूर्ण सामग्री का इस्तेमाल नहीं हुआ तो बारिश और मौसम के प्रभाव के कारण आने वाले समय में भवन की स्थिति फिर खराब हो सकती है।


बालक-बालिकाओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं
विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए मूलभूत सुविधाओं की स्थिति भी चिंता का विषय है। बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की समुचित व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, स्वच्छता और सम्मानजनक वातावरण सुनिश्चित करने के लिए शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहद जरूरी हैं। ऐसे में प्राथमिक विद्यालय में ही इन सुविधाओं की कमी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
CM हेल्पलाइन में शिकायत, फिर भी सवाल बरकरार
विद्यालय की समस्याओं को लेकर CM हेल्पलाइन में भी शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि संबंधित बीईओ और बीआरसी द्वारा विद्यालयों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जाता। यदि अधिकारी नियमित रूप से स्कूलों का जमीनी निरीक्षण करें तो भवन, शौचालय, पेयजल और अन्य मूलभूत समस्याएं समय रहते सामने आ सकती हैं और उनका समाधान भी कराया जा सकता है।

कागजों में विकास या जमीन पर?
सरकार द्वारा स्कूलों में बेहतर अधोसंरचना, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की बात कही जाती है। लेकिन भस्कुरा प्राथमिक शाला की स्थिति इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़ा करती है।
सवाल यह है कि यदि स्कूल भवन ही सुरक्षित नहीं है, बच्चों के लिए पर्याप्त और अलग शौचालय नहीं हैं तथा शिकायत के बाद भी समस्या बनी हुई है, तो शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य की बात कितनी प्रभावी होगी?
सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाई आवाज
ग्रामीण एवं सामाजिक कार्यकर्ता किशन पुरी ने विद्यालय की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि, “जब विद्यालय का भवन ही सुरक्षित नहीं होगा और बच्चों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तो शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर कैसे हो सकती है?”
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्राथमिक शाला भस्कुरा का तत्काल स्थल निरीक्षण कराया जाए और विद्यालय की वास्तविक स्थिति की जांच की जाए।
स्थायी समाधान की मांग
किशन पुरी ने मांग की है कि—
विद्यालय के जर्जर भवन की तकनीकी जांच कराकर स्थायी मरम्मत कराई जाए।
छत की मरम्मत में गुणवत्तापूर्ण सामग्री के उपयोग की जांच की जाए।
बालक एवं बालिकाओं के लिए अलग-अलग स्वच्छ और सुरक्षित शौचालय बनाए जाएं।
विद्यालय की अन्य मूलभूत आवश्यकताओं का भी निरीक्षण किया जाए।
बीईओ और बीआरसी द्वारा नियमित स्कूल निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए।
CM हेल्पलाइन में की गई शिकायत पर हुई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
क्या कहते है जनप्रतिनिधि-डालमम सिंह- सरपंच भस्कुरा- मैंने क़ई बार खराब स्कूल की व्यवस्था पर अधिकारियों को अवगत कराया हैं लेकिन अंतिम गांव होने से विकास कोसो दूर है। अब आगे पंचायत स्तर से इसे सुधार किया जाएगा। और ग्रामीणों के साथ कलेक्टर कार्यालय में शिकायत करेंगे
भस्कुरा की यह तस्वीर सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी निगरानी पर बड़ा सवाल है। जब सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए योजनाओं और बजट पर जोर दे रही है, तब यह जरूरी है कि योजनाओं का असर कागजों से निकलकर स्कूल की चारदीवारी और बच्चों की जिंदगी तक दिखाई दे।
आजाद भारत न्यूज़


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