गांवों में LPG सप्लाई ठप: उज्ज्वला योजना दम तोड़ती नजर आ रही, 30 किमी दूर से सिलेंडर लाने को मजबूर ग्रामीण।
कोटा (बिलासपुर) से ग्राउंड रिपोर्ट-
कोटा विकासखंड के बेलगहना, टेंगनमाड़ा,आमागोहन, खोंगसरा,टाटीधार सहित 30 से अधिक आदिवासी बहुल गांवों में एलपीजी गैस वितरण व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिन गांवों में कभी गैस सिलेंडर घर-घर पहुंचता था, वहां अब महीनों से सप्लाई बंद जैसी स्थिति है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें 25 से 35 किलोमीटर दूर बेलगहना और करीब 16 किलोमीटर दूर पीपरखूटी जाकर गैस सिलेंडर लेना पड़ रहा है—जो कि गरीब और दूरस्थ आदिवासी परिवारों के लिए लगभग असंभव है।
1000+ उज्ज्वला हितग्राही प्रभावित, महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान
इन गांवों में 1000 से अधिक परिवार प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े हैं।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को धुएं से मुक्ति और स्वच्छ ईंधन देना था, लेकिन वर्तमान हालात इसके उलट हैं:

गैस सिलेंडर की घर तक डिलीवरी बंद
कई हितग्राही दूसरी बार रिफिल नहीं करा पा रहे
महिलाएं फिर से लकड़ी और धुएं वाले चूल्हों पर खाना बनाने को मजबूर
सबसे ज्यादा असर बैगा जनजाति की महिलाओं और परिवारों पर पड़ा है।
‘स्मोक-फ्री’ सपना टूटा, फिर जंगल और लकड़ी पर निर्भरता
जिन परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत गैस चूल्हा और कनेक्शन मिला था, वे अब:
लकड़ी इकट्ठा करने जंगल जा रहे हैं
पारंपरिक चूल्हों पर खाना बना रहे हैं
कई घरों में गैस चूल्हा कबाड़ बन चुका है या बेच दिया गया
यह स्थिति सीधे तौर पर स्वास्थ्य, समय और पर्यावरण—तीनों पर नकारात्मक असर डाल रही है।

❗सबसे बड़ा सवाल: ‘हितग्राही नहीं ले रहे, तो सिलेंडर जा कहां रहे?’
ग्रामीणों और उपभोक्ताओं के आरोप बेहद गंभीर हैं:
शादियों, होटलों और केटरिंग से जुड़े लोगों को आसानी से गैस मिल रही है।
जबकि उज्ज्वला हितग्राही लंबी लाइन में भी खाली हाथ लौट रहे हैं
ऐसे में बड़ा सवाल खड़ा होता है:
जब हजारों हितग्राही गैस नहीं ले पा रहे, तो उनके नाम पर जारी होने वाले सिलेंडर की खपत आखिर कहां हो रही है?
क्या यह व्यावसायिक उपयोग में डायवर्ट हो रहा है?
क्या इसमें डीलर स्तर पर गड़बड़ी है?
यह जांच का बड़ा विषय बनता जा रहा है।
उपभोक्ता कार्ड और सिस्टम में गड़बड़ी
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि:
कई बैगा परिवारों के उपभोक्ता कार्ड उनके पास नहीं हैं
कुछ मामलों में कार्ड एजेंसी या अन्य लोगों के पास होने की आशंका
कई हितग्राही बुकिंग प्रक्रिया से अनजान
इससे यह भी शक गहराता है कि
क्या इन उपभोक्ता नंबरों का इस्तेमाल कहीं और किया जा रहा है?

डिजिटल गैप: ऑनलाइन बुकिंग बना सबसे बड़ा अवरोध
सरकार ने LPG बुकिंग को डिजिटल और ऑनलाइन कर दिया है, लेकिन:
आदिवासी और दूरस्थ गांवों में डिजिटल साक्षरता बेहद कम
नेटवर्क और इंटरनेट की गंभीर समस्या
बुजुर्ग और महिलाओं के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया जटिल
परिणाम:
लोग बुकिंग ही नहीं कर पा रहे, और सिस्टम उन्हें “निष्क्रिय” मान लेता है।
बेलगहना गैस एजेंसी में भारी अव्यवस्था, उपभोक्ता बेहाल
बेलगहना स्थित गैस वितरक (इंडेन ग्रामीण) पर उपभोक्ताओं ने कई गंभीर आरोप लगाए:
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
न बैठने की व्यवस्था
न शेड (छांव)
न पीने के पानी की सुविधा, डिस्ट्रीब्यूटर से बातचीत में उन्होंने उज्ज्वला पर चुप्पी साधी और गांव में वितरण नही करने की बात कही।
धीमी और अव्यवस्थित प्रक्रिया
घंटों लाइन में खड़ा रहना
सिर्फ 1–2 कर्मचारी पूरा काम संभालते हैं
एक ही सिस्टम से KYC, बिलिंग, पर्ची—सब कुछ
तकनीकी समस्याएं
बिजली जाते ही काम बंद
इन्वर्टर/बैकअप नहीं
इंटरनेट नहीं—मोबाइल डेटा पर निर्भरता
सर्वर डाउन की समस्या
यह स्थिति सीधे तौर पर प्रबंधन की लापरवाही और निगरानी की कमी को दर्शाती है।
नीति बनाम हकीकत: उज्ज्वला योजना कागज़ों में सफल, जमीन पर विफल?
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को देश की सबसे बड़ी सामाजिक योजनाओं में गिना जाता है, लेकिन:

ग्रामीणों की आवाज
“पहले घर में गैस आती थी, अब 30 किलोमीटर जाना पड़ता है—हम कैसे लाएं?”
“लाइन में लगकर भी खाली हाथ लौटना पड़ता है।”
“उज्ज्वला का लाभ सिर्फ पहली बार मिला, अब कुछ नहीं।”

समाधान: क्या होना चाहिए तुरंत?
गांव-गांव मोबाइल गैस वितरण वाहन शुरू हो
उज्ज्वला हितग्राहियों के लिए विशेष वितरण दिवस तय हों
डीलर की तत्काल जांच और ऑडिट
पंचायत स्तर पर बुकिंग सहायता केंद्र
डिजिटल साक्षरता अभियान
स्थानीय युवाओं को डिलीवरी सिस्टम में शामिल करना
दूरस्थ क्षेत्रों के लिए अलग सप्लाई मॉडल
योजना की थर्ड-पार्टी मॉनिटरिंग
शिकायतों के लिए स्थानीय हेल्पलाइन और त्वरित कार्रवाई
यह मामला सिर्फ गैस सप्लाई का नहीं, बल्कि
गरीब और आदिवासी समुदाय के अधिकार, सम्मान और बुनियादी सुविधा का है। जिला प्रशासन को ग्रामीण क्षेत्रो ने अपनी मोनिटरिंग बढ़ाकर व्यवस्था को सहीं करना चाहिए।
एक युवक शुक्ला दास मानिकपूरी ने भीषड़ गर्मी में 25 किलोमीटर सिलेंडर लाने की समस्या को सोशल मीडिया में उठाया। वीडियो देखें-
https://www.facebook.com/share/v/18akp1aWGR/
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