आंगनबाड़ी भवन निर्माण के नाम पर बरगद के पेड़ को पहुंचाया नुकसान, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
आमागोहन पंचायत का मामला, जांच और कार्रवाई की मांग तेज।
कोटा। विकासखंड कोटा की ग्राम पंचायत आमागोहन में आंगनबाड़ी भवन निर्माण को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। गांव के वर्षों पुराने बरगद के विशाल वृक्ष की बड़ी-बड़ी टहनियां काटे जाने और पेड़ को गंभीर क्षति पहुंचाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत द्वारा बिना ग्राम सभा की सहमति और स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए बरगद की मोटी शाखाओं को काट दिया गया, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है बल्कि ग्रामीणों की धार्मिक और सामाजिक भावनाएं भी आहत हुई हैं।

ग्रामीणों के अनुसार जिस स्थान पर आंगनबाड़ी भवन का निर्माण किया जा रहा है, वहां स्थित बरगद का पेड़ गांव की पहचान माना जाता है। यह पेड़ वर्षों से लोगों को छाया प्रदान करता रहा है और बच्चों के खेलने, ग्रामीणों के बैठने तथा सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान पेड़ की कई बड़ी शाखाओं को काट दिया गया, जबकि वैकल्पिक व्यवस्था तलाशकर पेड़ को सुरक्षित रखा जा सकता था।
मौके की तस्वीरों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि बरगद की मोटी शाखाओं को काटा गया है। कुछ शाखाएं पूरी तरह जमीन पर पड़ी हुई हैं, जबकि पेड़ के मुख्य हिस्से में भी कटाई के निशान दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में पेड़ की संरचना को गंभीर नुकसान पहुंचा है और भविष्य में इसके सूखने या गिरने का खतरा भी बढ़ सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बरगद का यह वृक्ष केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि कई परिवारों की आस्था का केंद्र भी है। पेड़ के तने पर धार्मिक वस्त्र बंधे होने से यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण इसकी पूजा-अर्चना भी करते रहे हैं। ऐसे में बिना व्यापक सहमति के पेड़ की शाखाएं काटे जाने से लोगों में नाराजगी है।


ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि भवन निर्माण आवश्यक था तो क्या निर्माण एजेंसी अथवा पंचायत ने वन विभाग, संबंधित तकनीकी अधिकारियों या पर्यावरणीय मानकों का पालन किया था? क्या पेड़ की शाखाओं की कटाई के लिए कोई अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति ली गई थी तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत द्वारा इस विषय पर पारदर्शिता नहीं बरती गई। लोगों का कहना है कि ग्राम सभा में इस विषय पर कोई विस्तृत चर्चा नहीं हुई और न ही पेड़ को होने वाले नुकसान के संबंध में गांव के लोगों से राय ली गई। अब जब मामला सामने आया है तो लोग इसकी निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत, वन विभाग और पंचायत विभाग से मामले की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नियमों का उल्लंघन कर पेड़ को नुकसान पहुंचाया गया है तो जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसे निर्माण कार्यों में पर्यावरण संरक्षण और जनभावनाओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। वर्षों पुराने वृक्षों को बचाते हुए निर्माण कार्य किए जा सकते हैं, बशर्ते योजना और संवेदनशीलता के साथ निर्णय लिए जाएं।


ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
बरगद के पेड़ को हुए नुकसान का तकनीकी मूल्यांकन कराया जाए।
शाखाएं काटने के लिए दी गई अनुमति और प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए।
दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं जिम्मेदार व्यक्तियों पर कार्रवाई की जाए।
भविष्य में ग्राम सभा की सहमति और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
आजाद भारत न्यूज़
आमागोहन, कोटा (बिलासपुर)
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