February 4, 2026

मैकल में सच बोलना अपराध बना: अवैध खनन पर रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकार पर जानलेवा हमला

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गौरेला–पेंड्रा–मरवाही, छत्तीसगढ़ | 14 जनवरी 2026

छत्तीसगढ़ के अमरकंटक–मैकल पर्वत श्रृंखला क्षेत्र में अवैध खनन और जंगलों की अंधाधुंध लूट पर सवाल उठाना अब जानलेवा साबित होने लगा है। 8 जनवरी 2026 की शाम इस सच्चाई को उजागर कर रहे पत्रकार सुशांत गौतम पर माफिया द्वारा किया गया हमला इस बात का सबूत है कि अब इस इलाके में सच बोलना भी अपराध बना दिया गया है।


सुशांत गौतम अपने सहयोगी रितेश गुप्ता के साथ अमरकंटक और मैकल पर्वत श्रृंखला क्षेत्र से अवैध क्रशर, अवैध खनन और पर्यावरणीय विनाश पर ग्राउंड रिपोर्टिंग कर वापस लौट रहे थे। वे लंबे समय से इस क्षेत्र में हो रही जंगल कटाई, पहाड़ों की खुदाई और नदी-नालों के विनाश को लेकर लगातार रिपोर्टिंग करते रहे हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पहाड़ियों को बचाने के लिए दिए गए आदेशों का हवाला देते हुए यह सवाल भी उठाया था कि अगर अरावली को बचाया जा सकता है तो अमरकंटक और मैकल पर्वत श्रृंखला को क्यों नहीं।


यही सवाल अवैध खनन माफिया को सबसे ज्यादा चुभ गया।
8 जनवरी की शाम जब वे जीपीएम जिले के धनौली गांव के पास पहुंचे, तभी अचानक एक सफेद कार उनकी गाड़ी के सामने आकर अड़ गई। उसी समय एक हाईवा गाड़ी साइड में लगा दी गई और पीछे से एक फोर व्हीलर आकर खड़ी हो गई। कुछ ही सेकंड में उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया गया। यह कोई सड़क हादसा या संयोग नहीं था, बल्कि पूरी तरह से सुनियोजित हमला था।
इसके बाद हमलावरों ने गालियां दीं और सुशांत गौतम को गाड़ी से बाहर उतरने के लिए कहा। माहौल पूरी तरह हिंसक हो चुका था। इसी दौरान एक व्यक्ति ने लोहे की रॉड से ड्राइवर साइड के कांच पर जोरदार वार किया। कांच चकनाचूर हो गया और उसके टुकड़े सुशांत गौतम के चेहरे और माथे पर जा लगे। उन्हें गंभीर चोट आई और खून बहने लगा। अगर वार थोड़ा और तेज होता तो उनकी जान जा सकती थी।
यह हमला किसी आवेश या गुस्से में नहीं किया गया था, बल्कि पूरी तैयारी के साथ किया गया जानलेवा हमला था।
हमलावरों ने इसी दौरान उनके सहयोगी रितेश गुप्ता का मोबाइल फोन भी जबरन छीन लिया और उसे बंद कर दिया, ताकि वे किसी से संपर्क न कर सकें और घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग न बच सके। सुशांत गौतम के मोबाइल के साथ भी जबरदस्ती की गई। इससे यह साफ हो जाता है कि हमलावरों का मकसद सिर्फ डराना नहीं था, बल्कि सबूत मिटाना और खबर को दबाना भी था।


घटना के बाद घायल अवस्था में सुशांत गौतम सीधे गौरेला थाना पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने FIR नंबर 0014/2026 दर्ज किया है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें हत्या की कोशिश, खतरनाक हथियार से हमला, आपराधिक धमकी और सामूहिक अपराध जैसे आरोप शामिल हैं।


FIR में तीन लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है – जयप्रकाश शिवदासानी (जेठू), ललन तिवारी और सुनील बाली। स्थानीय स्तर पर इन नामों का संबंध उसी क्षेत्र में चल रहे अवैध क्रशर और खनन नेटवर्क से बताया जाता है, जिस पर सुशांत गौतम लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे।
हमले के बाद अब पत्रकार पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं। यहां तक कि दूसरे इलाकों में उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराने की कोशिशों की भी जानकारी सामने आ रही है। यह वही तरीका है जो खनन और जमीन माफिया हमेशा अपनाता है – पहले हमला करना, फिर डर पैदा करना और फिर पीड़ित को ही अपराधी बनाने की कोशिश करना।


छत्तीसगढ़ पहले भी ऐसा देख चुका है। कुछ समय पहले पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई थी और उनका शव सेप्टिक टैंक में मिला था। सुशांत गौतम इस बार बच गए, लेकिन यह सिर्फ उनकी सूझबूझ और किस्मत की वजह से संभव हुआ। अगर वे उस समय गाड़ी से बाहर उतर जाते तो आज यह हमला नहीं, बल्कि हत्या की खबर होती।
अमरकंटक और मैकल पर्वत सिर्फ पहाड़ नहीं हैं। यही मध्य भारत के बड़े जलस्रोतों, जंगलों और लाखों लोगों की आजीविका का आधार हैं। इन इलाकों में चल रहे अवैध खनन को उजागर करना अगर जानलेवा अपराध बन जाए, तो यह लोकतंत्र और संविधान दोनों के लिए गंभीर खतरे की घंटी है।
सुशांत गौतम पर हुआ यह हमला साफ बताता है कि माफिया अब खबर से डरता

अब पूरे प्रदेश की नजर इस पर है कि क्या पुलिस और कानून उस पत्रकार को संरक्षण दे पाएंगे जिसने सच दिखाने की हिम्मत की है, या फिर एक बार फिर माफिया का डर कानून पर भारी पड़ेगा।

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