April 17, 2026

बिग ब्रेकिंग न्यूज़🔴 फूड पाइजनिंग की सूचना पर तत्काल स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे विधायक अटल श्रीवास्तव।

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आजाद भारत न्यूज़/ बेलगहना-कोटा।

कोटा क्षेत्र के बेलगहना में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां आंगनबाड़ी केंद्र में दिए गए पूरक पोषण आहार को खाने के बाद 5 मासूम बच्चे अचानक बीमार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र के विधायक अटल श्रीवास्तव ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
बताया जा रहा है कि ग्राम पंचायत करहीकछार के आश्रित ग्राम केकराडीह स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों ने नियमित रूप से मिलने वाला पूरक पोषण आहार ग्रहण किया था। इसके कुछ ही समय बाद बच्चों को उल्टी और दस्त की शिकायत शुरू हो गई, जिससे गांव में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तुरंत बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेलगहना में भर्ती कराया, जहां उनका इलाज जारी है।


विधायक ने दिए तत्काल निर्देश
स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर विधायक ने बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी ली और उपस्थित डॉक्टरों को तत्काल एवं समुचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने परिजनों से भी चर्चा कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और भरोसा दिलाया कि बच्चों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होगी।


खाद्य सामग्री के सैंपल लिए गए
घटना के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है। कोटा परियोजना अधिकारी श्रीमती सुरुचि श्याम और सेक्टर सुपरवाइजर कीर्ति किरण नोर्गे ने आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचकर वहां वितरित किए गए चावल, दाल और टमाटर के सैंपल जांच के लिए एकत्रित किए हैं। प्रारंभिक जांच में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं, हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट स्थिति सामने आएगी।


जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी
इस दौरान विधायक के साथ जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर के महामंत्री गणेश कश्यप, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी बेलगहना के अध्यक्ष अश्वनी उद्देश्य, उपसरपंच शिवदयाल निर्मलकर (कुरवार), अमित गुप्ता, तथा रामचंद्र गंधर्व भी मौजूद रहे।

महिला बाल विकास विभाग में लापरवाही! दौरे नहीं कर रहे अधिकारी, व्यवस्था पर उठे सवाल??
बेलगहना क्षेत्र में सामने आई फूड पाइजनिंग की घटना ने महिला बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी नहीं हो रही, जिसके कारण इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, सुपरवाइजर से लेकर ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारी तक समय-समय पर दौरा नहीं करते, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों की वास्तविक स्थिति पर किसी की नजर नहीं रहती। परिणामस्वरूप, पोषण आहार की गुणवत्ता, बच्चों की देखरेख और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं में लगातार लापरवाही देखने को मिल रही है।
यह भी आरोप है कि यदि नियमित निरीक्षण और निगरानी होती, तो खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पहले ही जांच में आ जाती और बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ जैसी स्थिति पैदा नहीं होती।
इस घटना के बाद अब क्षेत्र में यह मांग तेज हो गई है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और महिला बाल विकास विभाग में चल रही लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।


बड़ा सवाल: बच्चों की सुरक्षा पर खतरा?
यह घटना एक बार फिर आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित किए जा रहे पोषण आहार की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि जांच में लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है, तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
          फिलहाल सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई जा रही है, लेकिन पूरे मामले ने क्षेत्र में चिंता का माहौल बना दिया है।


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