April 28, 2026

राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों को नहीं मिल पा रही स्वास्थ्य सुविधा, उल्टी-दस्त से बैगा महिला की मौत

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आजाद भारत न्यूज़- खोंगसरा (ब्लॉक कोटा), जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़
आदिवासी बहुल क्षेत्र खोंगसरा में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां बैगा समुदाय की एक महिला की उल्टी-दस्त (डायरिया) से मौत हो गई। भीषण गर्मी, साफ पेयजल का अभाव और समय पर इलाज न मिल पाने के कारण हुई इस मौत ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।
पहचान और उम्र की जानकारी
मृतक महिला की पहचान धनमती बैगा पति सुखसिंह बैगा के रूप में हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी जन्मतिथि 01 जनवरी 1990 थी, जिससे उनकी उम्र लगभग 34–35 वर्ष बताई जा रही है।

बीमारी से मौत तक की स्थिति
ग्रामीणों के अनुसार, महिला पिछले कुछ दिनों से उल्टी-दस्त से पीड़ित थी। शुरुआत में सामान्य बीमारी मानकर स्थानीय स्तर पर इलाज किया गया, लेकिन हालत लगातार बिगड़ती गई।
समय पर उचित स्वास्थ्य सुविधा और डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजन उन्हें बेहतर इलाज नहीं दिला सके, जिससे अंततः उनकी मौत हो गई।

गर्मी और दूषित पानी से बढ़ रहा खतरा
क्षेत्र में इन दिनों:
भीषण गर्मी का प्रकोप है
साफ पेयजल की कमी बनी हुई है
दूषित पानी के कारण डायरिया के मामले बढ़ रहे हैं
इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से न तो कोई विशेष निगरानी दिखाई दे रही है और न ही त्वरित राहत व्यवस्था।

स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बनी बड़ी वजह
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि:
क्षेत्र में MBBS डॉक्टरों की भारी कमी है
नर्सिंग स्टाफ की भी कमी बनी हुई है
स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयां और संसाधन उपलब्ध नहीं
आपात स्थिति में समय पर इलाज नहीं मिल पाता
लंबे समय से इन समस्याओं को लेकर मांग की जा रही है, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं।

झोलाछाप डॉक्टरों का बढ़ता खतरा
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि क्षेत्र में फर्जी झोलाछाप डॉक्टर सक्रिय हैं, जो बिना उचित योग्यता के इलाज कर रहे हैं।
इन पर अब जानकारी जुटाई जा रही है और आशंका जताई जा रही है कि ऐसे ही अनियमित इलाज से कई मरीजों की हालत बिगड़ रही है।

जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
भाजपा मंडल अध्यक्ष राजू सिंह राजपूत ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में बैगा महिला की मौत बेहद दुखद है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की लापरवाही सामने आई है, वे फील्ड में मौजूद नहीं रहते। इस मामले में जांच कराकर कार्रवाई कराई जाएगी।”

जनपद सदस्य कांति बलराम मरावी ने कहा:
“समय पर उचित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिलने के कारण महिला की मौत हुई है। यह गंभीर लापरवाही है।”

प्रशासन पर उठे सवाल
यह घटना कई अहम सवाल खड़े करती है:
क्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं केवल कागजों तक सीमित हैं?
डॉक्टर और स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे?
झोलाछाप डॉक्टरों पर अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

ग्रामीणों की प्रमुख मांग
क्षेत्र में स्थायी डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति
स्वास्थ्य शिविर और नियमित जांच
साफ पेयजल की व्यवस्था
झोलाछाप डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई
जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच और दंडात्मक कार्रवाई


खोंगसरा की यह घटना केवल एक मौत नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों का आईना है। यदि समय रहते स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत नहीं किया गया, तो ऐसी घटनाएं आगे भी दोहराई जाती रहेंगी।

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