डायरिया से मां की मौत के बाद दो मासूम बच्चों पर जीवन का संकट,”प्रशासन से मदद की अपील”
पिता को पहले ही खो चुके बच्चे, अब सहारे के लिए प्रशासन की ओर उम्मीद।
आजाद भारत न्यूज़- एक आवाज इन राष्ट्रपति के दत्तक पुत्रों की।
खोंगसरा (ब्लॉक कोटा), जिला बिलासपुर।
आदिवासी बहुल क्षेत्र खोंगसरा में बैगा जनजाति की महिला धनमती बैगा की डायरिया (उल्टी-दस्त) से हुई मौत ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। इस घटना के बाद उनके दो छोटे बच्चे—कनिका (1 वर्ष) और रामप्रसाद (8 वर्ष)—अब माता-पिता के साये से वंचित होकर जीवन के कठिन दौर में खड़े हैं।
पहले पिता, अब मां का साया भी छिना
ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों के पिता का निधन कुछ वर्ष पहले ही हो चुका था। अब मां की मौत के बाद दोनों बच्चों के सामने पालन-पोषण, सुरक्षा और शिक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

बीमारी में नहीं मिली मदद, मौत के बाद पहुंचा अमला
परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि जब महिला बीमार थी, तब न तो कोई डॉक्टर पहुंचा और न ही स्वास्थ्य विभाग की टीम।
लेकिन मौत के बाद प्रशासनिक अमला गांव पहुंचा और औपचारिकताएं पूरी की गईं। घटना का पंचनामा,स्टाफ के साथ कार्यवाही की सेल्फी फ़ोटो और कार्यवाही की गई।
इससे ग्रामीणों में आक्रोश और निराशा का माहौल है।



बिना पोस्टमार्टम अंतिम संस्कार पर सवाल
सबसे गंभीर सवाल यह है कि महिला का अंतिम संस्कार बिना पोस्टमार्टम के कर दिया गया।
इससे मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं हो सकी, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बनी वजह
स्थानीय लोगों का कहना है कि:
क्षेत्र में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी है,जो लोग पदस्थ है वह भी नियमित सेवाएं नही देते।
स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं
समय पर इलाज नहीं मिलने से ऐसी घटनाएं हो रही हैं।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से उम्मीद
ग्रामीणों ने मांग की है कि:
दोनों बच्चों के पालन-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाए
परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए
क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को तत्काल मजबूत किया जाए
यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की परीक्षा है जो जरूरत के समय कमजोर पड़ जाती है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इन बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

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