बालिकाओं के भविष्य से खिलवाड़? गुणवत्ता पर उठे सवाल, मुख्य अतिथि के अभाव में डेढ़ माह से रुका साइकिल वितरण
खोंगसरा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 45 छात्राओं को मिलनी है साइकिल, शाला विकास समिति का गठन भी अधूरा??
आजाद भारत न्यूज़-प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट-
खोंगसरा (बिलासपुर)। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी सरस्वती साइकिल योजना का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में सुविधा उपलब्ध कराना, बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना तथा स्कूल छोड़ने की दर को कम करना है। लेकिन बिलासपुर जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला खोंगसरा में यह योजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।

विद्यालय में कक्षा 9वीं की 45 पात्र छात्राओं के लिए साइकिलें पहुंच चुकी हैं और विद्यालय परिसर में रखी हुई हैं, लेकिन विद्यालय खुलने के करीब डेढ़ माह बाद भी उनका वितरण नहीं हो पाया है। स्थानीय स्तर पर बताया जा रहा है कि मुख्य अतिथि की उपलब्धता नहीं होने के कारण वितरण कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सका। ऐसे में दूर-दराज के गांवों से प्रतिदिन विद्यालय आने वाली छात्राओं को योजना का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।
वीडियो देखें
https://www.instagram.com/reel/DbTAm6gsWxN/?igsh=dGJsZXA4bG9wZHBh
सायकिल की गुणवत्ता पर सवाल???
इस बीच विद्यालय में रखी साइकिलों की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि साइकिलों के कुछ हिस्सों की गुणवत्ता अपेक्षा के अनुरूप नहीं दिख रही है। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी सक्षम विभाग द्वारा कोई तकनीकी जांच या आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वितरण से पहले साइकिलों की गुणवत्ता की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि छात्राओं को टिकाऊ और सुरक्षित साइकिलें मिल सकें। विद्यालय में शाला विकास समिति (एसडीएमसी) का नया गठन भी अब तक नहीं हो पाया है। समिति का गठन लंबित रहने से कई प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।


प्रभारी प्राचार्य का पक्ष
विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य दुजलाल लहरे ने बताया कि शाला विकास समिति के गठन के लिए कई बार बैठक बुलाई गई, लेकिन पर्याप्त संख्या में पालकों की उपस्थिति नहीं होने के कारण समिति का गठन नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि समिति के गठन की प्रक्रिया जारी है। साइकिल वितरण के संबंध में उन्होंने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार कार्यक्रम आयोजित कर वितरण कराया जाएगा।
उठ रहे सवाल??
जब साइकिलें विद्यालय पहुंच चुकी हैं, तो छात्राओं को समय पर उनका लाभ क्यों नहीं मिल रहा?
क्या केवल मुख्य अतिथि की अनुपलब्धता के कारण योजनाओं का लाभ रोका जाना उचित है?
यदि गुणवत्ता को लेकर शिकायतें हैं, तो क्या वितरण से पहले तकनीकी जांच कराई जाएगी?
शाला विकास समिति का गठन समय पर क्यों नहीं हो सका और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
स्थानीय अभिभावकों एवं ग्रामीणों ने मांग की है कि 45 छात्राओं को बिना अनावश्यक देरी के साइकिलों का वितरण किया जाए तथा गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोष पाए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि शासन की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ समय पर जरूरतमंद छात्राओं तक पहुंच सके।
![]()