पंचायतो में व्यापक भ्रष्टाचार, सीईओ कोटा युवराज सिन्हा पर संरक्षण का आरोप,सुशासन में शिकायत के बाद भी चुप्पी??
कोटा/बिलासपुर:आजाद भारत न्यूज़-
कोटा ब्लॉक के ग्राम पंचायत आमागोहन सहित आसपास के पंचायतों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ताजा आरोपों के साथ-साथ अप्रैल 2026 में सामने आई पुरानी खबरें भी अब इस पूरे मामले को और गंभीर बना रही हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
“नाली और सड़क चोरी” या कागजी विकास?
अप्रैल 2026 में प्रकाशित एक समाचार में ग्राम पंचायत आमागोहन में नाली निर्माण घोटाले का खुलासा हुआ था।
15वें वित्त आयोग के तहत नाली निर्माण के लिए लाखों रुपये स्वीकृत और भुगतान किए गए
पंचायत राज पोर्टल पर भुगतान का पूरा रिकॉर्ड दर्ज
लेकिन जमीनी स्तर पर नाली का निर्माण नहीं मिला
दर्ज भुगतान:
₹2,00,000 (05/12/2024)
₹49,500 (15/12/2024)
₹49,500 (15/12/2024)
इन वाउचरों में मुख्य सड़क से सरगोंड नाला और फॉरेस्ट कॉलोनी तक नाली निर्माण का उल्लेख है, लेकिन स्थल निरीक्षण में कार्य शून्य पाया गया। ऐसे ही 2 नाली और 2 सीसी सड़क बना ही नही है ।
30 लाख से ज्यादा निकासी, काम शून्य
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के अनुसार:
पिछले 2 पंचवर्षीय से सचिव राजेश उइके एक ही पंचायत में पदस्थ
इस दौरान 30 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाली गई
लेकिन विकास कार्य नगण्य या शून्य नजर आ रहे हैं
आरोप है कि नाली, सीसी सड़क, मोटर पंप और अन्य कार्यों के नाम पर राशि का लगातार गबन किया गया।

शिकायतें, लेकिन कार्रवाई नहीं
इस पूरे मामले की शिकायत: सुशासन दिवस जैसे बड़े कार्यक्रम में ,जिला पंचायत सीईओ, कलेक्टर बिलासपुर
तक की गई, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अधिकारियों द्वारा जानकारी देने में टालमटोल की जा रही है और जवाबदेही से बचने की कोशिश की जा रही है।
सीईओ कोटा( युवराज सिन्हा)-का बयान- जब इस विषय पर उनसे बात हुई तो हर बार की तरह उन्होंने यही कहा-मैं जांच टीम भेजूंगा दिखवाता हूँ।
सीईओ पर संरक्षण का गंभीर आरोप
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कोटा जनपद पंचायत के सीईओ युवराज सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि:
उन्हें पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई
पंचायत सचिव और सरपंच को संरक्षण दिया जा रहा है
भ्रष्टाचार “मिलीभगत” से संचालित हो रहा है।
कांग्रेस नेता चितरंजन शर्मा ने कहा कि बिना संरक्षण के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है। सभी कामों की लंबी सूची मेरे पास है। जिसे विधायक जी और उच्च अधिकारियों तक प्रेषित की गई है।
“आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर लूट”
सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप कुमार ने कहा:
“पंचायती राज व्यवस्था गांवों को मजबूत करने के लिए बनी है, लेकिन कोटा ब्लॉक के आदिवासी क्षेत्रों में यह व्यवस्था भ्रष्टाचार का माध्यम बनती जा रही है। यदि निष्पक्ष जांच हो, तो कई और बड़े घोटाले सामने आएंगे।”

सिस्टम पर बड़े सवाल
यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है:
क्या बिना जांच के भुगतान हो रहा है?
क्या निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल है?
क्या शिकायतों को जानबूझकर दबाया जा रहा है?
अब क्या मांग?
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मांग की है:
उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच
दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों को तत्काल हटाया जाए
गबन की राशि की रिकवरी
सभी पंचायत कार्यों का भौतिक सत्यापन
आमागोहन पंचायत का यह मामला अब “नाली घोटाले” से बढ़कर व्यापक पंचायत भ्रष्टाचार का रूप ले चुका है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह ग्रामीण विकास योजनाओं में जनता का भरोसा पूरी तरह खत्म कर सकता है।

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