जल जीवन मिशन में बड़ा खेल: 30 साल पुराने कनेक्शन पर टिकी सप्लाई, 4 किमी के बजाय 1.2 किमी पाइपलाइन, आमागोहन में अधूरा काम और बढ़ता खतरा
आजाद भारत न्यूज़- खोंगसरा- कोटा-बिलासपुर।
कोटा विकासखंड के ग्राम पंचायत आमागोहन में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्य अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गए हैं। “हर घर जल” जैसे महत्वाकांक्षी अभियान का उद्देश्य जहां प्रत्येक घर तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है, वहीं आमागोहन में यह योजना कागजों तक सीमित और जमीन पर अधूरी नजर आ रही है।
योजना का उद्देश्य बनाम जमीनी हकीकत
सरकारी स्वीकृति के अनुसार गांव में लगभग 4 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाकर हर घर तक जल कनेक्शन पहुंचाना था। इसके साथ ही पुराने जर्जर पाइपलाइन नेटवर्क को पूरी तरह बदलना भी योजना का हिस्सा था, ताकि वर्षों से चली आ रही जल समस्या का स्थायी समाधान हो सके।
लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक, अब तक केवल लगभग 1200 मीटर पाइपलाइन ही बिछाई गई है। वह भी पूरी गुणवत्ता के साथ नहीं, बल्कि कई जगहों पर अधूरी और असंगठित तरीके से काम किया गया है। इससे बड़ी आबादी अब भी जल कनेक्शन से वंचित है।

30 साल पुराने कनेक्शन पर निर्भर गांव
सबसे चिंताजनक बात यह है कि गांव में आज भी करीब 30 साल पुराने पाइपलाइन कनेक्शन से पानी की सप्लाई की जा रही है।
ये पाइपलाइन अब जर्जर हो चुकी हैं—
जगह-जगह लीकेज
पानी का कम दबाव
कई घरों तक पानी का न पहुंचना
गर्मी के मौसम में स्थिति और बदतर हो जाती है, जब मांग बढ़ने पर भी सप्लाई पूरी तरह जवाब दे देती है।
योजना के तहत पूरे नेटवर्क को बदलना था, लेकिन आरोप है कि केवल मुख्य मार्ग या सामने के हिस्सों में ही नया काम दिखाकर बाकी क्षेत्रों में पुराने पाइपों पर ही “लीपापोती” कर दी गई।
हितग्राहियों से ही कराया गया काम
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कई जगहों पर पाइपलाइन बिछाने का काम ठेकेदार द्वारा नहीं, बल्कि खुद हितग्राहियों से मजदूर लगवाकर कराया गया।
यह न केवल योजना के नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इससे कार्य की गुणवत्ता और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े होते हैं।

खुले गड्ढे बने दुर्घटना का कारण
पाइपलाइन डालने के लिए गांव में जगह-जगह गड्ढे खोदे गए, लेकिन काम अधूरा छोड़ देने के कारण ये गड्ढे आज भी खुले पड़े हैं।
जानवरों के गिरने की घटनाएं
बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा
बरसात में और अधिक जोखिम
ग्रामीणों का कहना है कि यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।
अधूरा मोटर पंप हाउस और अव्यवस्थित वाल्व
योजना के तहत बनने वाला मोटर पंप हाउस अब तक पूरा नहीं हुआ है। आये दिन मोटर और केबल चोरी जैसे गतिविधियों से संमस्या होती है।
वहीं कई स्थानों पर पाइपलाइन के वाल्व खुले में या गड्ढों में दबे हुए हैं, जिससे भविष्य में तकनीकी खराबी और जल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है।
ठेकेदार की सफाई: फंड और मजदूरों की कमी
इस मामले में ठेकेदार प्रदीप गुप्ता का कहना है कि पिछले डेढ़ साल से फंड जारी नहीं हुए हैं, जिसके कारण काम प्रभावित हुआ है।
उन्होंने मजदूरों की कमी को भी देरी का कारण बताया और जल्द काम शुरू करने का आश्वासन दिया है।

जनप्रतिनिधियों का आरोप: हर बार एक ही जवाब
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने ठेकेदार के जवाब को नकारते हुए कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। हर बार इसी तरह के बहाने दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिखता।
पंच प्रतिनिधि राजेश पांडेय ने स्पष्ट कहा कि:
पूरे कार्य की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए
ठेकेदार के कार्य और खर्च का ऑडिट होना चाहिए
मामले को उच्च अधिकारियों और CMO कार्यालय तक ले जाया जाएगा
ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
गांव के लोगों में इस पूरे मामले को लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकार की इतनी महत्वपूर्ण योजना का इस तरह अधूरा और लापरवाहीपूर्ण क्रियान्वयन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही:
पूरी पाइपलाइन नहीं बिछाई गई
पुराने कनेक्शन नहीं बदले गए
खुले गड्ढे बंद नहीं किए गए
तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
देश के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने जल जीवन मिशन को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस योजना में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा है कि यदि किसी ने “जल जीवन मिशन” में अनियमितता की, तो उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं। आमागोहन जैसे कई गांवों में योजना के कार्य अधूरे, लापरवाहीपूर्ण और अनियमितताओं से घिरे नजर आ रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि जब शीर्ष स्तर से स्पष्ट निर्देश हैं, तो आखिर नीचे स्तर पर जिम्मेदार लोग अब भी क्यों नहीं सुधर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल
“हर घर जल” का सपना आखिर कैसे पूरा होगा, जब योजनाएं कागजों में पूरी और जमीन पर अधूरी रह जाएं?
आमागोहन और ऐसे जंगल के कितने आदिवासी ग्रामों की यह स्थिति न केवल स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि यदि समय रहते निगरानी और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
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