May 2, 2026

डायरिया से मौत के बाद बैगा परिवार तक पहुँची मदद, प्रबल प्रताप जूदेव ने वीडियो कॉल पर जाना हाल,हर संभव मदद का आश्वासन।

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जूदेव ने कहा– “यह क्षति कष्टमय है, हर संभव सहयोग करेंगे”

खोंगसरा/कोटा (बिलासपुर) | आजाद भारत न्यूज़
कोटा क्षेत्र के खोंगसरा गांव में डायरिया (उल्टी-दस्त) से एक बैगा महिला की मौत के बाद उपजे संवेदनशील मामले में अब जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बढ़ गई है। जहां एक ओर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पीड़ित परिवार तक मदद पहुंचाने के प्रयास भी शुरू हो गए हैं।


भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं छाया विधायक प्रबल प्रताप जूदेव ने पीड़ित परिवार से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर उनका हालचाल जाना और संवेदना व्यक्त की।
जूदेव का बयान: “यह क्षति कष्टमय है, मैं बहुत दुखी हूं”
प्रबल प्रताप जूदेव ने बातचीत के दौरान कहा कि यह घटना बेहद दुखद और कष्टमय है। उन्होंने कहा,
“यह क्षति कष्टमय है। मैं बहुत दुखी हूं। प्रदेश में विष्णु देव सरकार है, मैं इस मामले को उनके संज्ञान में लाकर हर संभव मदद सुनिश्चित करूंगा। मैं अभी बाहर हूं, लेकिन जल्द स्वयं आकर परिवार से मिलूंगा। राहत कोष और व्यक्तिगत सहयोग के लिए परिवार की हर संभव मदद करेंगे।” जूदेव ने यह बताया कि कलेक्टर बिलासपुर को सूचना दी गयी है। ग्राम में स्वास्थ्य शिविर भी आयोजित की जाएगी।


प्रतिनिधि मंडल ने पहुंचकर दी सहायता
जूदेव के निर्देश पर उनके प्रतिनिधि मंडल की ओर से मंडल अध्यक्ष राजू सिंह राजपूत तुमाडबरा गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने परिवार की स्थिति का जायजा लेते हुए आगे भी सहयोग जारी रखने का भरोसा दिलाया।


इस दौरान सरपंच प्रतिनिधि शिवमान सिंह एवं जनपद सदस्य प्रतिनिधि बलराम मरावी भी मौजूद रहे। सभी ने मिलकर बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने और परिवार को हर संभव मदद दिलाने की बात कही।

खोंगसरा पंचायत के अंतिम आश्रित ग्राम।तुमाडबरा में जनप्रतिनिधियों ने दौरा किया।


बच्चों के सामने बड़ा संकट
मृतका के पति का पहले ही निधन हो चुका था और अब महिला की मौत के बाद दोनों छोटे बच्चे पूरी तरह बेसहारा हो गए हैं। फिलहाल उनकी देखरेख मृतका की बड़ी बहन और जीजा कर रहे हैं, लेकिन आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।


स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि महिला की तबीयत बिगड़ने के बावजूद समय पर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी। न तो डॉक्टर पहुंचे और न ही कोई मेडिकल टीम। घटना के बाद प्रशासनिक अमला जरूर सक्रिय हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।


क्षेत्र में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी, दवाइयों का अभाव और स्वच्छ पेयजल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। भीषण गर्मी के कारण डायरिया के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रभावी रोकथाम के प्रयास नहीं दिख रहे।


मदद और जांच की मांग
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और परिवार को स्थायी आर्थिक सहायता देने की मांग भी उठाई गई है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन और सरकार इस संवेदनशील मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं और पीड़ित परिवार को किस प्रकार स्थायी राहत मिलती है।
— आजाद भारत न्यूज़

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