सुशासन शिविर या सिर्फ औपचारिकता? बिटकुली शिविर में अव्यवस्थाओं का अंबार, जनप्रतिनिधियों ने उठाए गंभीर सवाल
सुशासन के अव्यवस्थाओं के बीच मुख्य अतिथि प्रबल प्रताप जूदेव हुए नाराज,अधिकारियों को नसीहत
बिटकुली (कोटा विकासखंड), बिलासपुर।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आयोजित सुशासन तिहार के तहत लगाए जा रहे शिविरों पर अब सवाल उठने लगे हैं। कोटा विकासखंड के बिटकुली में आयोजित शिविर में अव्यवस्था, लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की अनुपस्थिति ने पूरे आयोजन की मंशा पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया।
व्यवस्था नदारद, अधिकारी गायब
शिविर में विभिन्न विभागों के स्टॉल तो लगाए गए, लेकिन अधिकांश स्टॉल बिना जिम्मेदार अधिकारियों के खाली नजर आए। कई विभाग जैसे रेशम और क्रेडा विभाग के स्टॉल ही नहीं लगे। जो कर्मचारी मौजूद थे, वे भी सक्रिय भूमिका निभाने के बजाय केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज कराते दिखे।
स्थिति इतनी गंभीर रही कि कई अधिकारी शिविर से बाहर अपनी गाड़ियों में बैठकर आराम करते देखे गए।


जनप्रतिनिधि और पत्रकार भी उपेक्षित
शिविर में जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों के लिए न तो बैठने की उचित व्यवस्था की गई थी और न ही किसी प्रकार का स्वल्पाहार उपलब्ध कराया गया। इससे आयोजन की तैयारी और गंभीरता दोनों पर सवाल खड़े हुए।
सूचना के अभाव में भटकती रही जनता
सुशासन शिविर में न्याय मिलने की उम्मीद लेकर रतनपुर क्षेत्र के कई ग्रामीण आवेदन लेकर पहुंचे, लेकिन उन्हें यह जानकारी ही नहीं थी कि उनके लिए अलग स्थान निर्धारित है। सूचना के अभाव में लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ा, जिससे प्रशासनिक समन्वय की कमी साफ नजर आई।
आमागोहन पंचायत में लापरवाही उजागर
ग्राम आमागोहन में सुशासन तिहार के तहत आवेदन लेने में गंभीर लापरवाही सामने आई। पंचायत सचिव द्वारा समय पर आवेदन नहीं लिए गए और बाद में आनन-फानन में सरपंच द्वारा आवेदन लिए गए, जो केवल दिखावा साबित हुआ।
स्थिति यह रही कि एक भी आवेदन शिविर तक जमा नहीं किया गया, जिससे ग्रामीणों को दोबारा आवेदन देना पड़ा।

अवैध रेत खनन पर फूटा जनाक्रोश
शिविर स्थल पर अवैध रेत खनन के खिलाफ ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने खुलकर विरोध जताया। आरोप लगाया गया कि खनन विभाग की मिलीभगत से लगातार रेत उत्खनन हो रहा है, जिससे अरपा नदी समय से पहले सूखने लगी है और जल स्तर तेजी से गिर रहा है।
सवाल उठाया गया कि कार्रवाई के दौरान वाहन थाने तक पहुंचने से पहले ही कैसे छोड़ दिए जाते हैं। साथ ही रेत जांच नाका (बैरियर) स्थापित करने की मांग भी की गई।

आवास घोटाले की गूंज
शिविर में आवास योजना में बड़े स्तर पर गड़बड़ी का मुद्दा उठाया गया। आमागोहन, खोंगसरा और टाटीधार पंचायतों में बैगा परिवारों को दिए गए 100 से अधिक आवास अधूरे और गुणवत्ताहीन पाए गए।
आरोप है कि ठेकेदारों ने लाभार्थियों के खातों से राशि निकालकर गबन किया, जबकि कई घर आज भी अधूरे और खंडहर जैसे हैं। इस मामले में राज्य स्तरीय जांच की मांग की गई।

निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार का आरोप
ग्राम आमागोहन में नाली, सड़क और चबूतरा निर्माण में भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया। बिना निर्माण कार्य किए ही राशि निकालने के आरोप सरपंच और सचिव पर लगे हैं।
इस संबंध में पूर्व में भी शिकायत की गई थी, लेकिन एक वर्ष बाद भी कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।

स्वास्थ्य विभाग पर तीखी नाराजगी
शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति पर भी गंभीर सवाल उठे। आरोप है कि स्वास्थ्य कर्मचारी फोन तक नहीं उठाते और नियमित ड्यूटी भी नहीं करते।
इस दौरान प्रबल प्रताप जूदेव ने मंच से बीएमओ को फटकार लगाते हुए कहा—
“आप जनता के सेवक हैं, अपनी आदत सुधारिए, नहीं तो ऊपर तक शिकायत जाएगी और कार्रवाई तय है।”
उन्होंने हाल ही में उल्टी-दस्त से हुई बैगा महिला की मौत का भी जिक्र किया और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया।
जल जीवन मिशन और पेयजल संकट
ग्रामीणों ने शिकायत की कि जल जीवन मिशन के तहत अधिकांश गांवों में काम अधूरा पड़ा है और आज भी लोग पानी के लिए परेशान हैं। ठेकेदारों और इंजीनियरों पर लापरवाही के आरोप लगाए गए।
शिक्षा, पुलिस और अन्य मांगें भी उठीं
खोंगसरा में अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने की मांग
आमागोहन में नई पुलिस चौकी स्थापना की मांग
बालक छात्रावास निर्माण का प्रस्ताव
पेंशन और मुआवजा न मिलने की शिकायत
पशु चिकित्सक की नियुक्ति की मांग।
बिजली बिल पर भी सवाल
एक महिला ने मंच पर पहुंचकर 16,000 रुपये के बिजली बिल की शिकायत की। इस पर जूदेव ने बिजली विभाग से सवाल किया कि गरीब महिला इतना भारी बिल कैसे चुकाएगी। विभाग ने शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया।
सड़क और विकास कार्यों की मांग
खोंगसरा से बेलगहना होते हुए रतनपुर-केंदा स्टेट हाईवे से जोड़ने तथा पेंड्रा मार्ग को विकसित करने के लिए आवेदन प्रस्तुत किए गए।
वन क्षेत्र को ‘डियर जोन’ बनाने की मांग
खोंगसरा वन परिक्षेत्र को ‘हिरण जोन’ घोषित कर संरक्षण और पर्यटन विकास की मांग भी शिविर में प्रमुखता से उठाई गई।
बिटकुली में आयोजित सुशासन शिविर ने यह स्पष्ट कर दिया कि योजनाओं की मंशा और जमीनी क्रियान्वयन में बड़ा अंतर है।
जहां एक ओर सरकार सुशासन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और लापरवाही से जूझती जनता अब जवाब मांग रही है।

मुख्य अतिथियों की उपस्थिति और स्वागत समारोह
बिटकुली में आयोजित सुशासन शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष प्रबल प्रताप जूदेव शामिल हुए। उनके साथ जिला अध्यक्ष मोहित जायसवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, जनपद अध्यक्ष सूरज साधेलाल भारद्वाज, सभापति निरंजन पैकरा, भाजपा जिला उपाध्यक्ष राजेश कश्यप, मंडल अध्यक्ष (कोटा) बजरंग जायसवाल एवं मंडल अध्यक्ष राजू सिंह राजपूत उपस्थित रहे।
इसके अलावा जनपद सदस्य परमेश्वर खुशरो, शंकर लाल सोनी, कांति बालराम मरावी और रोहणी नेतु यादव (जनपद कौंचरा) सहित अन्य जनप्रतिनिधियों की भी उपस्थिति रही।
प्रशासनिक अमले में अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) प्रवेश पैकरा, तहसीलदार, पटवारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।





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