बिग ब्रेकिंग न्यूज़: छत्तीसगढ़ में नकली पनीर और भ्रामक डेयरी उत्पादों पर सख्ती, सरकार ने लगाया प्रतिबंध
आजाद भारत न्यूज़:-रायपुर–
स्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं: छत्तीसगढ़ में भ्रामक डेयरी एनालॉग उत्पादों पर प्रतिबंध लागू
आजाद भारत न्यूज़ | रायपुर | 31 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बड़ा निर्णय लेते हुए राज्य में भ्रामक डेयरी एनालॉग (Dairy Analog) एवं गैर-दुग्ध लेकिन दुग्ध उत्पाद जैसे दिखने वाले खाद्य पदार्थों के निर्माण, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस संबंध में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 31 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित की गई है।


सरकार के अनुसार, बाजार में ऐसे कई उत्पाद बेचे जा रहे हैं जो वास्तविक दूध से तैयार नहीं होते, लेकिन उनकी पैकेजिंग, लेबलिंग और प्रस्तुति इस प्रकार की जाती है कि उपभोक्ता उन्हें असली दूध, पनीर या अन्य डेयरी उत्पाद समझ लेते हैं। इससे उपभोक्ताओं के साथ भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत जारी किया गया है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि ऐसे गैर-दुग्ध उत्पाद, जो स्वयं को दूध या डेयरी उत्पाद जैसा प्रदर्शित करते हैं, उनके निर्माण से लेकर विक्रय तक सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी।
किन उत्पादों पर रहेगा प्रतिबंध?
- ऐसे उत्पाद जो वास्तविक दुग्ध उत्पाद नहीं हैं।
- जिनमें दूध के स्थान पर वनस्पति वसा, वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का उपयोग किया गया हो।
- ऐसे उत्पाद जिनकी पैकेजिंग, लेबलिंग या विक्रय का तरीका उपभोक्ताओं को भ्रमित करता हो कि वह वास्तविक दूध या दुग्ध उत्पाद है।
हालांकि, अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि फ्रोजन डेज़र्ट, प्रोसेस्ड चीज़ और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे उत्पाद, यदि निर्धारित खाद्य मानकों का पालन करते हैं और उनकी सही पहचान दर्शाई गई है, तो वे इस प्रतिबंध के दायरे में नहीं आएंगे।
सरकार ने कहा है कि यह कदम उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने, खाद्य सुरक्षा कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने और भ्रामक व्यापारिक गतिविधियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। आदेश के पालन की जिम्मेदारी खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा राज्य के सभी संबंधित अधिकारियों को सौंपी गई है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

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