अवैध पेड़ों की कटाई जारी, ठूंठ बने सबूत… आखिर जिम्मेदार कौन? वन विभाग नदारद।
आजाद भारत न्यूज़- रतनपुर-बिलासपुर-वन विभाग-
बिलासपुर | कागज़ों में जंगल बचाने की योजनाएँ और ज़मीनी हकीकत में जंगलों की कटाई—रतनपुर वन परिक्षेत्र के परसापनी बीट क्रमांक 2549 की स्थिति इन दोनों के बीच के गहरे अंतर को उजागर कर रही है। यहां जंगल के भीतर जो दृश्य दिखाई दे रहे हैं, वे वन संरक्षण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
ठूंठ बन चुके पेड़ दे रहे गवाही
जंगल के अंदर प्रवेश करते ही साल और अन्य कीमती इमारती पेड़ों के कटे हुए ठूंठ साफ दिखाई देते हैं। ये ठूंठ मानो इस बात की गवाही दे रहे हों कि लंबे समय से यहां अवैध कटाई का खेल चल रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह काम अचानक या एक-दो दिन में नहीं हुआ, बल्कि काफी समय से लगातार कीमती लकड़ियों को काटकर बाहर ले जाया जा रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार रात के अंधेरे में जंगल से लकड़ियों को निकालने की गतिविधियाँ भी देखी जाती रही हैं। इसके बावजूद अब तक कोई बड़ी जब्ती या ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जिससे वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
इस पूरे मामले में कई ऐसे प्रश्न हैं जिनका जवाब मिलना जरूरी है—
क्या बीट गार्ड और जिम्मेदार अधिकारी जंगल में हो रही इस कटाई से अनजान हैं?
क्या भारी मात्रा में लकड़ी काटकर बाहर ले जाना बिना किसी स्तर की मिलीभगत के संभव है?
अगर कटाई लंबे समय से चल रही है तो अब तक कोई बड़ी कार्रवाई या गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई?
इन सवालों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों के मन में संदेह पैदा कर दिया है।

पर्यावरण और वन्यजीवों पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों की लगातार कटाई केवल पेड़ों का नुकसान नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर पर्यावरण संतुलन और वन्यजीवों पर पड़ता है। जंगल कम होने से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होता है और वे भोजन की तलाश में मानव बस्तियों की ओर बढ़ने लगते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावना भी बढ़ जाती है।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते अवैध कटाई पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले वर्षों में यह पूरा क्षेत्र अपनी हरियाली खो सकता है।

अब कार्रवाई पर टिकी निगाहें
अब सवाल यह है कि क्या इस मामले के सामने आने के बाद बिलासपुर के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच करेंगे? क्या दोषी कर्मचारियों और लकड़ी माफिया पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर मामला केवल कागजी जांच तक सीमित रह जाएगा?????
फिलहाल ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों की निगाहें वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। जंगलों की सुरक्षा केवल सरकारी दावों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाली सख्त कार्रवाई से ही सुनिश्चित हो सकती है।
फील्ड स्तर की व्यवस्था पर भी सवाल
जंगल की सुरक्षा के लिए फील्ड स्तर पर डेली वेज के चौकीदार, फायर वॉचर और पैदल गार्ड के साथ-साथ नियमित कर्मचारी जैसे वनरक्षक, डिप्टी रेंजर और रेंजर की जिम्मेदारी तय होती है। लेकिन परसापनी बीट में लगातार सामने आ रही अवैध कटाई की घटनाओं ने इन सभी की ड्यूटी और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि फील्ड में इतनी बड़ी टीम तैनात है, तो फिर जंगल के भीतर कीमती पेड़ों की कटाई आखिर कैसे और किसकी निगरानी में हो रही है?

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