भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे बेलगहना तहसीलदार, बर्खास्तगी की उठी मांग।

ग्रामीण, जनप्रतिनिधि और अधिवक्ताओं ने कलेक्टर व राजस्व मंत्री को भेजी शिकायत–
बेलगहना (कोटा ब्लॉक) — बेलगहना तहसील में पदस्थ तहसीलदार अभिषेक राठौर पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के गंभीर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अधिवक्ताओं ने उनकी बर्खास्तगी की मांग की है। आरोप है कि तहसीलदार न केवल राजस्व कार्यों में उदासीन हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के साथ दुर्व्यवहार भी करते हैं।


शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पिछले लंबे समय से मौखिक शिकायतें दी जा रही थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंततः कलेक्टर और राजस्व मंत्री को लिखित शिकायत सौंपी गई है।
मामला 1: अवैध रेत परिवहन में मिलीभगत का आरोप
करीब पंद्रह दिन पहले अवैध रेत ले जा रहे दो ट्रैक्टर और एक हाइवा को जब्त कर तहसील कार्यालय लाया गया। गवाहों ने इसकी तस्वीरें भी लीं। आरोप है कि तीन-चार दिन बाद मोटी रकम लेकर वाहन छोड़ दिए गए, जबकि बरसात के मौसम में रेत निकासी पर पूर्ण प्रतिबंध है। पहले जब्ती मामलों में सख्ती बरती गई थी, लेकिन इस बार “विशेष मेहरबानी” क्यों हुई, यह सवाल उठाया जा रहा है।
मामला 2: जमानत में पैसों का खेल
करहीकछार पंचायत के केकराडीह गांव में आपसी विवाद के बाद गिरफ्तार दो भाइयों को अगले दिन जमानत पर छोड़ दिया गया। आरोप है कि तहसील कार्यालय में मौजूद लाल जी टांडिया ने तहसीलदार के नाम पर दोनों पक्षों से पैसे की उगाही की। इस संबंध में फोन रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें कहा जा रहा है कि “पैसा साहब के लिए है”।
अनधिकृत रूप से कार्यरत लाल जी पर भी आरोप
शिकायत में कहा गया है कि लाल जी टांडिया बिना अधिकृत पद के तहसील में काम कर रहे हैं और जन्म, जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र व जमीन संबंधी कार्यों में अलग-अलग दर से रिश्वत वसूलते हैं।

पटवारी पर ऑनलाइन रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पटवारी द्वारा जानबूझकर किसानों के बी-वन रिकॉर्ड में गलत प्रविष्टियां की जाती हैं और फिर सुधार के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। इस वजह से किसान बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर होते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी मामलों की उच्च स्तरीय जांच कर भ्रष्ट व निष्क्रिय अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।