February 4, 2026

हसदेव अरण्य बचाने NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष शुभम पेन्द्रों का बड़ा कदम-नेता प्रतिपक्ष को पत्र लिखकर हाथी–मानव संघर्ष, जंगल कटाई और आदिवासी सुरक्षा पर उठाई आवाज।

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गौरेला–पेंड्रा–मरवाही।(GPM) प्रदीप शर्मा की रिपोर्ट-
छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कोल ब्लॉक के नाम पर हो रही अंधाधुंध जंगल कटाई और उससे उत्पन्न गंभीर हाथी–मानव संघर्ष को लेकर NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष शुभम पेन्द्रों ने बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा के माननीय नेता प्रतिपक्ष को विस्तृत पत्र प्रेषित कर हसदेव अरण्य को बचाने, आदिवासी समाज की सुरक्षा सुनिश्चित करने और शासन की विफल नीतियों पर विधानसभा में विशेष चर्चा कराने की मांग की है।

शुभम पेन्द्रों ने पत्र में उल्लेख किया है कि हसदेव अरण्य जैसे घने और जैव विविधता से भरपूर जंगलों में कोल ब्लॉक हेतु की जा रही कटाई से हाथियों का प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहा है। इसके चलते हाथी गांवों की ओर विस्थापित हो रहे हैं और मरवाही, कोरबा, कटघोरा, धरमजयगढ़ एवं सरगुजा जैसे क्षेत्रों में स्थिति अत्यंत भयावह हो चुकी है।

आंकड़े जो शासन की विफलता उजागर करते हैं
पत्र में दिए गए आंकड़ों के अनुसार,
हाथी हमलों में अब तक लगभग 303 निर्दोष ग्रामीणों की मौत हो चुकी है।
करंट, अवैध शिकार और प्रशासनिक लापरवाही के कारण करीब 90 हाथियों की भी मौत दर्ज की गई है।
औसतन हर वर्ष 60 से अधिक लोग हाथी–मानव संघर्ष का शिकार बन रहे हैं।
इन चिंताजनक आंकड़ों के बावजूद न तो लेमरू हाथी रिजर्व परियोजना को प्रभावी रूप से लागू किया गया और न ही स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल की गई।

गरीब आदिवासी परिवार सबसे अधिक प्रभावित-
शुभम पेन्द्रों ने कहा कि इस पूरे संकट की सबसे बड़ी मार गरीब, आदिवासी और वन–आश्रित ग्रामीण परिवारों पर पड़ रही है। जिनके पास न सुरक्षित आवास है, न संसाधन और न ही इस आपदा से उबरने की क्षमता। हाथियों के हमलों से खेत, मकान और आजीविका नष्ट हो रही है, जिससे ग्रामीण भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर हैं।
प्रमुख मांगें जो पत्र में रखी गईं
पत्र के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष से निम्न प्रमुख मांगों पर हस्तक्षेप का आग्रह किया गया है—
हसदेव अरण्य में कोल ब्लॉक हेतु जंगल कटाई से हो रहे हाथी विस्थापन और हाथी–मानव द्वंद्व पर विधानसभा में विशेष चर्चा कराई जाए।
लेमरू हाथी रिजर्व परियोजना की विफलता और प्रशासनिक लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
मरवाही क्षेत्र को पूर्ण रूप से लेमरू हाथी रिजर्व परियोजना में शामिल किया जाए।
आने वाले वर्षों में लेमरू परियोजना के लिए बजट में पर्याप्त वृद्धि की जाए, ताकि चरागाह विकास, जल स्रोत निर्माण और सुरक्षित गलीयारे विकसित किए जा सकें।
हाथी हमलों में मृतकों एवं फसल, मकान और आजीविका क्षति से प्रभावित परिवारों को उचित और त्वरित मुआवजा दिया जाए।
प्रभावित आदिवासी परिवारों के लिए विशेष राहत व पुनर्वास पैकेज, सुरक्षित आवास और स्थायी आजीविका की व्यवस्था की जाए।
संवेदनशील क्षेत्रों में क्विक रिस्पांस टीम (QRT), हाथी अलर्ट सिस्टम और रात्रिकालीन निगरानी व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए।

विधानसभा में आवाज उठाने की अपील-
पत्र के अंत में शुभम पेन्द्रों ने नेता प्रतिपक्ष से अपील की है कि वे जनहित, आदिवासी समाज की सुरक्षा, वन संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस गंभीर जन एवं वन्यजीव संकट पर सरकार को कठघरे में खड़ा करें और विधानसभा में सशक्त रूप से आवाज उठाएं।
शुभम पेन्द्रों का यह कदम हसदेव अरण्य बचाने और आदिवासी समाज के हक़ की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

— आजाद भारत न्यूज़
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